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Monday, December 19, 2022

देवों का सहयोग मिले जब

परमात्मा सर्वशक्तिमान है, वह सर्जक है, नर्तक है, वह दृष्टा है, स्वप्नदर्शी है। वह अनंत है और अनंत हैं उसके उसके आयाम। उसके हर गुण, हर क्षमता को एक देवी या देवता का रूप दे दिया गया है। इसलिए देवी-देवता अनेक हैं। मानव का हृदय जब स्वार्थ से ऊपर उठ जाता है,  उसमें उन देवताओं का वास हो जाता है। महापुरुषों में दैवीय गुण होते हैं और असुरों में आसुरी शक्तियों का वास बन जाता है। हमें यदि प्रेम, शांति, आनंद जैसे गुणों को अपने भीतर धारण करना है तो इनके देवताओं का वरण करना होगा। उनका स्मरण मात्र करना होगा; तथा अपनी सच्ची आकांक्षा के अनुरूप हम पाएँगे कि वे हमारे आस-पास ही विचरते हैं। पुराणों में लिखी देवों की कहानियाँ प्रकृति के अटल, सत्य नियमों का निरूपण हैं। अतीत काल से मानव व देव मिलजुल कर इस धरती पर आते रहे हैं। दोनों ही परमात्मा की कृति हैं। जब मानव ने विज्ञान को ही सब कुछ मान लिया , वह भूल ही गया कि विज्ञान के नियमों के पीछे भी वही शक्ति है। अब समय आ गया है कि विज्ञान और अध्यात्म एक ही मार्ग पर चलें और यह धरती अपने वैभव को प्राप्त हो। 


Thursday, July 12, 2018

उठ जाग मुसाफिर भोर भयी


१३ जुलाई २०१८ 
बचपन से हम सुनते आये हैं, सुबह जल्दी उठना चाहिए, ब्रह्म मुहूर्त में उठने से बहुत प्रकार के लाभ होते हैं. संत और शास्त्र कहते हैं, उस समय आकाश में देवता भ्रमण करते हैं. सूर्योदय से दो घंटे पूर्व का समय ब्रह्म मुहूर्त माना गया है. इस बात में कितनी सच्चाई है, इसका अनुभव तो जल्दी उठकर ही हो सकेगा. जब आकाश में तारे भी निकले हों और पूर्व दिशा अभी श्रृंगार की तैयारी ही कर रही हो. उस समय हवा शीतल होती है, और एक शांत मौन सब ओर पसरा होता है. पंछियों का कलरव उस मौन को नवीन आभा से भर रहा होता है. ऐसे वातावरण में परमात्मा का स्मरण अपने आप ही होने लगता है. उस वक्त की गयी प्रार्थना सीधे दिल से उपजती है और तत्क्ष्ण देवों के द्वारा ग्रहण कर ली जाती है. वर्तमान पीढ़ी के लिए सुबह जल्दी उठना संभव ही नहीं हो पाता क्योंकि उनकी रात देर से आरम्भ होती है. किन्तु जिनके लिए यह संभव है, वे भी यदि इस अनमोल समय के साक्षी नहीं बनते तो अवश्य ही अपना परम हित नहीं कर रहे हैं.

Wednesday, March 14, 2012

आत्मा का पथ सुंदर है


जनवरी २००३ 
हमें यह सुंदर जीवन भोग के कारण दुःख उठाने के लिये नहीं मिला है, बल्कि योग के द्वारा अनंत शांति, प्रेम व आनंद को पाने के लिये मिला है. देवों और असुरों की तरह हमारा मन व आत्मा दोनों ही परमात्मा के हैं, असुर भी कोई कम शक्तिशाली तो थे नहीं, देवताओं को हरा देते थे, वैसे ही मन के प्रभाव में आकर हम विकारों के गुलाम बनते हैं, तृष्णाओं की आग में स्वयं को जलाते हैं. अब कंस और रावण के मार्ग पर चल कर कोई आनंद कैसे पा सकता है. फिर यह सोच कर खुद पर क्रोध भी आता है कि जीवन का अनमोल समय व्यर्थ बीता जा रहा है, सुख आज भी दूर है. मन के मार्ग पर चलेंगे तो अंत में सिवाय दुःख व बेचैनी के कुछ हाथ आने वाला नहीं है. तो मार्ग क्या है, यही कि मन को पहचान लें और जितनी जल्दी हो सके आत्मा के पथ के राही बन जाएँ, आरम्भ में सब अनजाना भले ही लगे पर अंत में परमात्मा ही मिलेंगे अर्थात आनंद, प्रेम, शांति, शक्ति, सुख, ज्ञान व पवित्रता...!