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Saturday, July 20, 2013

ध्यान कमल खिलाएं भीतर

नवम्बर २००४ 
ध्यान करने से पूर्व आवश्यक है कि लक्ष्य का निर्धारण कर लिया जाये, चित्त की शुद्धि के लिए या भक्ति की प्राप्ति के लिए. इससे ध्यान की उर्जा केन्द्रित होगी अन्यथा इधर-उधर बिखर जाएगी. ऊर्जा के सही प्रवाह के लिए रास्ते भी बनाने होंगे अन्यथा बिना नालियों वाले खेत की तरह पानी खेत को ही बर्बाद कर देगा. ध्यान के द्वारा हम अपने मन की गहराइयों में छिपे संस्कारों को बदल सकते हैं. भीतर कोई गाँठ न रहे, हृदय खुलता जाये, पारदर्शी हो जाये, ताकि मनके दर्पण में आत्मा का सूरज चमकने लगे, यही ध्यान से होना है. जीवन से व्यर्थ कब विदा होने लगता है, पता ही नहीं चलता. जो चिर है, शुभ है, सुंदर है वही हमारा अभीष्ट हो जाता है.