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Monday, August 6, 2018

भीतर बाहर एक हुआ जो


६ अगस्त २०१८ 
संत कहते हैं, मनसा, वाचा, कर्मणा हमें एक होना है, जैसा हम सोचते हैं, वैसा ही वाणी में प्रकटे, उसी के अनुसार हमारे कृत्य हों. तभी जीवन में सच्चा योग फलित होता है. हो सकता है हमारे भाव शुद्ध हों पर वाणी कठोर हो जाती हो, अथवा जितना कार्य हम करना चाहते हों, उतना करते न हों. हमारे संकल्प जब तक पूर्णता को प्राप्त नहीं हो जाते तब तक योग जीवन में नहीं उतरा. कोई व्यक्ति बहुत श्रम करता है किंतु करते समय प्रसन्न नहीं है, अर्थात उसका मन कार्य के साथ एक नहीं हुआ. कोई ऊपर से बहुत मधुर बोलता है पर मन से उसके विपरीत सोचता है, तब भी भीतर संघर्ष बना ही रहेगा. जिस क्षण हम पूर्ण सकारात्मक हो जाते हैं, बाहर कैसी भी परिस्थिति हो मन में एक शांति का अनुभव करते हैं, तब बोलते समय वाणी की सजगता बनी रहेगी, कृत्य करने में त्रुटियाँ भी कम होंगी. जीवन का हर दिन एक नयी चुनौती लेकर आता है, बल्कि हर क्षण ही हमारे सामने एक अवसर होता है, जिसमें हम योग के पद पर स्थित रह सकते हैं अथवा उससे नीचे उतर सकते हैं.

Tuesday, December 18, 2012

एक भरोसा उसी का


जो व्यवहार हम दूसरों से नहीं चाहते वह हमें भी उनके साथ नहीं करना चाहिए. साधक को तो मनसा, वाचा, कर्मणा हर पल सजग रहना है, और यह भी ध्यान रखना है कि हम मन, बुद्धि अथवा शरीर पर भरोसा नहीं कर सकते. शरीर अस्वस्थ हो सकता है, मन बदल सकता है और बुद्धि पलट सकती है. आत्मा सदा एक सा है, ध्रुव है, अटल है, न बदलने वाला है, हमें उसी का आश्रय लेना है, सभी के भीतर वह विद्यमान है सो सभी के प्रति हमारा भाव सम होना चाहिए, अपने समान ही. ध्यान में जब समय का भान नहीं रहता, मन को जैसे पंख लग जाते हैं, उसे ऑंखें भी मिल जाती है, वह सुन भी सकता है, बोल भी सकता है, छू भी सकता है, मन तब सूक्ष्मतर हो जाता है, अपने मूल स्वरूप में आ जाता है, कोई भीतर जग जाता है. वही आत्मा है. ध्यान है मौन धारे निश्चल बैठे रहना, उसके सान्निध्य में रहना जो हमारे कर्मों का साक्षी है, जो हमारे विचारों को हमसे भी पहले पढ़ लेता है, जो हमने प्रेम करता है, जो हमारे सर पर हाथ रखता है, जो हमारे साथ है, जो पुकारते ही उत्तर देता है, जो अनंत काल से है तथा अनंत काल तक रहेगा.


प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
लगभग तीन सप्ताहों के अंतराल के पश्चात आपसे मुखातिब हूँ, यात्रा सुखद रही, वाराणसी में देव दीवाली देखने का सुअवसर मिला, बैंगलोर में आर्ट ऑफ लिविंग के आश्रम में रहने का, गौहाटी में गीता मंदिर देखने का, विस्तृत विवरण कुछ समय बाद. ब्लॉग जगत में इस दौरान कितना कुछ लिखा गया होगा, कितना कुछ पढ़ा गया होगा...सब जानने की उत्सुकता लिए आने वाले उत्सवों की बधाई !