Tuesday, August 4, 2015

सुख सपना दुःख बुलबुला


प्रारब्ध वश सुख-दुःख तो हमें मिलने ही वाले हैं, सुख आने पर यदि अभिमान आ गया तो नया कर्म बना लिया जिसका फल भविष्य में दुःख रूप में आएगा, दुःख आने पर यदि दुखी हो गये तो भी नया बीज डाल दिया जिसका परिणाम दुख आने ही वाला है. साधक को चाहिए कि दोनों ही स्थितियों में सम रहे, वे जैसे आये हैं वैसे ही चले जायेंगे, नया कर्म बंधेगा नहीं, वर्तमान भी सुधर गया और भविष्य भी. समता का अभ्यास नियमित ‘ध्यान’ करके किया जा सकता है. 

8 comments:

  1. सुख सुख में समत्व भाव ही जीवन में सफलता का आधार है...

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  2. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (07.08.2015) को "बेटी है समाज की धरोहर"(चर्चा अंक-2060) पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।

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  3. सही है... हर रात के बाद दिन आता ही है ...

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  4. आसान सा लगता है कठिन भी है पर असँभव नहीं ।

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  5. " सुख दुखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ ।
    ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि ॥"
    गीता

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  6. duniya me kuchh bhi asambhav nhi hai bs kaam ko krne ki ichchha shakti honi chaahiye...
    Get Govt Job Alert

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  7. कैलाश जी, ज्योति जी, शकुंतला जी, सुधीर जी व सुशील जी आप सभी का स्वागत व आभार !

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