जून २००५
जो जिस भी वस्तु का हकदार
होता है, उस वह मिल ही जाती है, किन्तु जो आत्मनिर्भर है वह जीवन में सफलता अवश्य
पाता है. दुनिया जिसे सफलता कहती है वैसी सफलता न भी पाए पर जो खुद की तलाश में
लगा है वही सही अर्थों में सफलता की राह पर है. इन्सान का जीवन खुदा ने इसीलिए
बनाया है कि वह खुद को ढूँढे, खुदी के पीछे ही खुदा है, जो खुद से मिल गया वह खुदा
को भी पा ही लेता है. जगत में साधारणतया माँ-पिता बच्चों से जो प्रेम करते हैं वह
मोह ही कहा जायेगा, वे उन्हें किसी तकलीफ में नहीं देखना चाहते, इसलिए बचपन से ही
आत्मनिर्भर होने का पाठ नहीं पढ़ाते, लेकिन तकलीफ पाए बिना कोई नेमत भी नहीं मिलती
है.