Showing posts with label उद्देश्य. Show all posts
Showing posts with label उद्देश्य. Show all posts

Thursday, April 6, 2023

ज़िंदगी इक सफ़र है सुहाना

जीवन एक यात्रा है, इसका अर्थ हुआ कि इस यात्रा का कोई उद्देश्य भी होगा और कोई लक्ष्य भी अवश्य होगा। जैसे यदि हमें कश्मीर की यात्रा पर जाना है तो हमारा लक्ष्य है कश्मीर और उद्देश्य है कश्मीर की सुंदरता को देखकर आनंदित होना।यदि हमारे जीवन का उद्देश्य भी इस जगत की सुंदरता को देखकर आनंदित होना बन जाए तो लक्ष्य तो पहले से ही प्राप्त हो चुका है, अर्थात हम मानव जन्म लेकर इस धरती पर आ चुके हैं। अब जैसे कश्मीर की यात्रा में हमें सहयात्री भी मिलेंगे, जिनसे हम प्रसन्न होकर बात करेंगे; कुछ बाधाएँ भी आ सकती हैं, जिन्हें यात्रा में आने वाली छोटी-मोटी दिक़्क़त समझकर हम नज़र अंदाज़ कर देंगे। जीवन की इस यात्रा में भी हमें परिवार, मित्र, समाज के रूप में सहयात्री मिलते हैं। कभी कोई कष्ट भी सहने पड़ते हैं। इनके बावजूद यदि हम अपना उद्देश्य सदा याद रखें तो हर पल आनंद का अनुभव कर सकते हैं। कश्मीर की यात्रा से हमारे कारण कुछ लोगों का रोज़गार चलेगा और हमारा ज्ञान बढ़ेगा, सहनशक्ति बढ़ेगी और देश में विभिन्न राज्यों के लोगों में भाईचारा और आपसी विश्वास भी बढ़ेगा। ऐसे ही जीवन में हमारा अल्पकाल का वास दूसरों के लिए लाभ का कारण बने, समाज में प्रेम का संदेश फैले, और हमारा व्यवहार ऐसा हो कि आपसी विश्वास को ठेस न पहुँचे तो आनंद पाने का हमारा उद्देश्य सहज ही पूर्ण हो जाएगा। 


Monday, March 18, 2013

एक प्रार्थना ऐसी भी


जून २००४ 
यदि कोई बेचैन नहीं होता, हर परिस्थिति को समता से स्वीकार करता है, तभी समझना चाहिए कि वह प्रेम में है, प्रेम किया नहीं जाता यह एक अवस्था है, इसका प्रमाण है हमारे भीतर की अथाह शांति.. हम पहाड़ के नीचे की घास बन जाएँ, अर्थात निरभिमानी हो जाएँ, तो ही शांति का अनुभव कर सकते हैं. दुःख आने पर हम पत्थर बन जाएँ अर्थात दृढ रहें, एक आत्मीयता का भाव भीतर रहे. ज्ञान की अग्नि अशुभ संकल्पों को जला दे पर हृदय इतना तप्त न हो कि हम अकेले-अकेले ही अपने भीतर के सुख को पाना चाहें, हम अपने आंगन में चमेली का पौधा बन जाएँ जो भीतर रहने वालों और बाहर गुजरने वाले लोगों को सुगंध से भर देता है. जब किसी को प्रेम का प्रसाद मिल चुका हो तब उसके जीवन का और कोई उद्देश्य नहीं रह जाता सिवाय इसके कि वह अपनी ऊर्जा बाँटें, आनंद, शांति और प्रेम की ऊर्जा. 

Saturday, July 14, 2012

एक रहस्य सबके भीतर


साधक को किसी भी बात पर परेशानी होती ही नहीं, आनंद का स्रोत यदि भीतर मिल गया हो तो छोटी-छोटी बातों का असर नहीं होता, हम किसी महान उद्देश्य को पाने के लिये यहाँ भेजे गए हैं. वह रहस्य हमारे भीतर है, उसके ही निकट हमें जाना है, जीवन के हर पल का उपयोग उस परम सत्य की खोज में हो सके तो ही जीवन सफल है. हमारा रोजमर्रा का कार्य भी उसी ओर इंगित करे, हमारे विचार, हमारा आचरण भी वही दर्शाये, हम जो भी अनुभव करें, सच्चे मन से करें, सजग होकर करें,  विवेक को जगाएं. मिथ्या अहं को त्याग कर जीवन को एक विराट परिदृश्य में देखें. हम सभी श्वास के द्वारा एक दूसरे से जुड़े हैं, हमारी चेतना परम चेतना का ही अंश है. हम अपरिमित शक्ति के स्वामी हैं !


Friday, July 13, 2012

प्रार्थना में बल है


मई २००३ 
हे परमेश्वर ! हमारा आज का दिन मंगलमय हो, अंतर में शांति का साम्राज्य बना रहे. उसे कोई भी न तोड़ सके, मन समता से भरपूर हो. जो सुखकारी हो, मंगलकारी हो ऐसा वातावरण हम बनाएँ, सत्य वाणी ही हम बोलें. कर्म परम लक्ष्य की ओर ले जाने वाले हों. नियमपूर्वक अविरत हम अपना नियत कर्म पूरा करें, प्रमाद हमें छू भी न पाए. सौम्यता, कोमलता और मधुरता हमारे आभूषण बनें हमारी  प्रार्थना में पुरुषार्थ हो, श्रम हो तभी हमारी प्रार्थना सफल होगी. कभी-कभी जीवन हमारी परीक्षा लेता है, इसमें ईश्वर पर अटूट विश्वास ही हमें स्थिर रख सकता है. जो कुछ भी हो रहा है उसके पीछे कोई न कोई उद्देश्य है, धागे जो उलझ गए हैं अपने आप ही सुलझ जायेंगे, जहाँ अंधकार नजर आता है कल वहीं उजाला होगा. अभी जहाँ उलझाव है वहीं उसके पीछे उसका हल है जो हमें अभी नजर न आ तरह हो पर भविष्य में आयेगा. वह परम चेतना हम सब के भीतर है, सभी को निर्देश दे रही है. हम सभी सुरक्षित हाथों में हैं.