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Wednesday, October 3, 2018

माता भूमि: पुत्रोहं पृथिव्या:


४ अक्तूबर २०१८ 

भारत के प्रधानमन्त्री माननीय मोदी जी को चैम्पियन ऑफ़ द अर्थ पुरस्कार मिला है, हर भारतीय का मस्तक गर्व से ऊंचा हुआ है. ‘यथा राजा तथा प्रजा’ के सूत्र के अनुसार हम सभी इस धरती का रक्षक बनने की क्षमता रखते हैं. हम यदि अपने समय और ऊर्जा का अल्प भाग भी अपने वातावरण के प्रति सजग होकर लगायें तो देखते ही देखते भारत भी विकसित देशों की तरह अपनी स्वच्छता पर गर्व कर सकता है. अवश्य ही बाधाएँ आएँगी किन्तु उन्हें दूर करने की हिम्मत भी साथ ही आएगी. समस्या-समाधान भी रात-दिन की तरह जोड़े में ही रहते हैं. इससे आने वाली पीढ़ी भी बचपन से ही इस भाव से संस्कारित होगी. यदि हम छोटा सा ही सही एक बगीचा लगायें, या गमलों में ही कुछ पौधे उगायें. हफ्ते में एक बार अपनी गली और मोहल्ले की सफाई में भाग लें. आस-पड़ोस के बच्चों को इकठ्ठा करके उन्हें स्वच्छ रहने के लाभ बताएं और इस विषय पर चित्र आदि बनवाएं, कितने ही उपाय हैं जिनके द्वारा हम लघु अंश में ही सही धरती माँ का ऋण उतार सकते हैं.  

Wednesday, August 8, 2012

प्रेम जो बन जाता है भक्ति


जुलाई २००३ 
भक्त के हृदय में पूर्ण विश्वास होता है कि ईश्वर उससे प्रेम करता है. परमात्मा के वचन उसे बदल देते हैं. वह अनंत है और उसकी महिमा अवर्णनीय है, वह इतना महान है फिर भी वह भक्त को इस योग्य समझता है कि वह उसकी कृपा पाए. वह उसका मित्र है उसकी आत्मा का रक्षक. वह उसकी हर श्वास में है, वही उसके तन में रक्त बन कर प्रवाहित हो रहा है. भक्त उसी से है, वह इतना प्रिय है कि उसका नाम ही जीवन को सुंदर बना रहा है. वह भक्त से दूर तो नहीं फिर भी उसकी आँखों में उसके लिये आँसुओं की झड़ी लग जाती है. कभी उसकी याद आती है तो मन कृतज्ञता से भर जाता है. कभी उसको याद करके अधर मुस्कुराने लगते हैं, वह उसे शक्ति और सामर्थ्य से भर जाता है. वह हर क्षण उसे आगे ले जाना चाहता है. उसने भक्त के हृदय में प्रेम का बीज बोया है, सभी के प्रति प्रेम ! जो अब विशाल वृक्ष बन गया है, उसकी दृष्टि में सभी कुछ उसी चैतन्य के कारण हो रहा है. पंछियों का कलरव हो अथवा मानवों की भाषा, वही तो हर जगह बोल रहा है.