हिंदी एक सरल, सुंदर, सहज व समृद्धभाषा है, इसका शब्दकोश अति विशाल है। हिंदी साहित्य की परंपरा अति प्राचीन काल से आरंभ होती है । समय के साथ-साथ हिंदी के रूप बदलते रहे हों पर या एक विस्तृत धारा की तरह अनेक भाषाओं के शब्दों को सहेजती, परिवर्तित करती बहती आयी है। यह भारत के विभिन्न प्रदेशों को जोड़ने वाली संपर्क भाषा है और एक दिन सारे विश्व को आपस में जोड़ने वाली सम्पर्क भाषा बनने की क्षमता इसमें है। यह भारत की राजभाषा होने के साथ-साथ उत्तर भारत के नौ राज्यों की भी आधिकारिक भाषा है।विश्व के अनेक विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ायी जाती है; वहाँ हिंदी में साहित्य भी रचा जाता है। इंटर्नेट के इस युग में हिंदी में लिखने वाले ब्लॉगर्स की संख्या भी बढ़ती जा रही है। सोशल मीडिया के हर रूप में हिंदी का प्रयोग बढ़ रहा है। यह सब देखकर लगता है हिंदी का भविष्य उज्ज्वल है। ऐसे में हिंदी भाषियों का दायित्व हो जाता है कि वे अधिक से अधिक शुद्ध हिंदी का प्रयोग करें , उसे सिखाएँ, प्रचार करें तथा उसके साहित्य का अध्ययन करें।
Tuesday, September 13, 2022
Monday, September 14, 2020
हिंदी दिवस पर आप सभी को शुभकामनायें
प्राकृत से अपभ्रंश और अपभ्रंश से ब्रज, अवधी व मैथिली आदि विभिन्न रूपों में परिवर्तित होती हुई हिंदी को आज हम जिस रूप में देखते हैं, उसको यहां तक पहुँचाने में हिंदी भाषा के कवियों का बहुत बड़ा योगदान है. कबीर, रैदास, सूर, मीरा, तुलसी, बिहारी, भारतेंदु हरिश्चंद्र से होती हुई हिन्दी की यह धारा मैथिलीशरण गुप्त, जयशंकर प्रसाद, निराला, पन्त, महादेवी वर्मा और उनके बाद दिनकर, अज्ञेय, भवानीप्रसाद मिश्र, मुक्तिबोध, नीरज, तथा रघुबीर सहाय जैसे अनेकानेक रचनाकारों के काव्य सृजन से विकसित होती आ रही है. हिंदी कविता के इस विशाल भंडार के प्रति आज की पीढ़ी कितनी सजग है और उससे कितना ग्रहण कर सकती है इस पर ही हिंदी के भविष्य को आंका जा सकता है. आज आवश्यकता है हम अपनी साहित्यिक धरोहर का सम्मान करें, उसमें से कुछ मोती चुनें और उनकी प्रतिभा से चमत्कृत होकर अपने भीतर सुप्त पड़ी काव्य चेतना को जगाएं.