Sunday, March 15, 2020

कोरोना भयभीत करो ना



आज विश्व एक विचित्र दौर से गुजर रहा है. कोरोना के खिलाफ सभी देश आपसी भेदभाव को भुला कर एक हो गये हैं. चीन से दिसंबर में हुई इसकी शुरुआत के बाद इटली, स्पेन और ईरान में कहर बरसाता हुआ यह वायरस भारत में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है. सरकार की तरफ से दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं. भीड़भाड़ वाले इलाकों से बचना है, रेल, बस या हवाई यात्रा करना सुरक्षित नहीं है. बंगलुरू में तो सभी शिक्षा संस्थान, मॉल, दफ्तर, सिनेमाघर आदि बंद कर दिए गए हैं. लोग घर से काम कर रहे हैं, बच्चे अभी से ग्रीष्मकालीन छुट्टियों का लुत्फ़ उठा रहे हैं. जीवन जैसे एकाएक बदल गया है. प्रधानमंत्री ने पड़ोसी देशों को इस अदृश्य शत्रु से लड़ने में हर तरह की सहायता देने का आश्वासन दिया है. इस महामारी के कारण कुछ फायदे भी हो सकते हैं. सड़कें खाली रहेंगी तो ट्रैफिक की समस्या नहीं होगी, प्रदूषण कम होगा. बच्चों को परीक्षाओं का भय नहीं सताएगा. लोग घरों में रहेंगे तो आपसी मेलजोल बढ़ेगा. घर पर भोजन बनाने की प्रथा पुनः जागृत होगी. साफ-सफाई का ध्यान रखा जायेगा, जीवन में शुचिता का सम्मान होगा. व्यायाम के प्रति भी लोग सचेत होंगे, जड़ी-बूटी से रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के नुस्खे पुनः काम में लाये जायेंगे. यदि हर कोई अपनी सुरक्षा का ध्यान रखे तो इस रोग से न केवल बचा जा सकता है, इसे फैलने से रोका जा सकता है.

8 comments:

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    1. स्वागत व आभार शास्त्री जी !

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  2. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज सोमवार 16 मार्च 2020 को साझा की गई है...... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. बहुत बहुत आभार !

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  3. आपका कहना सही है ..।
    ध्यान ख़ुद को ही रखना होगा ... बचाव ख़ुद करना समझदारी है ...

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  4. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (18-03-2020) को    "ऐ कोरोना वाले वायरस"    (चर्चा अंक 3644)    पर भी होगी। 
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
     -- 
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  

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  5. बहुत बहुत आभार !

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