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Monday, March 6, 2023

होली के दिन दिल मिल जाते हैं

होली का उत्सव यानि प्रेम का उत्सव !  होली रंगों में भीग कर सबके साथ एक हो जाने का उत्सव है, छोटे-बड़े का भेद भुलाकर समानता का अनुभव करने का उत्सव है. हर पुरानी कड़वाहट को मिटाकर गुझिया की मिठास बांटने का उत्सव है. होली जैसा अनोखा उत्सव और कोई नहीं, जिसमें एक दिन के लिए मन अतीव उल्लास से भर जाता है. जान-पहचान हो या न हो सभी को रंग लगाने का अपने आनंद में शामिल करने का जिसमें सहज ही प्रयास होता है. मन विशाल हो जाता है, किन्तु इसे भी कुछ लोग अहंकार के कारण चूक जाते हैं. हमारे आपसी मतभेद और टकराहटें जब समष्टि के इतने बड़े आयोजन को देखकर भी दूर नहीं होते तब उनके मिटने का और कोई उपाय नजर नहीं आता.

Wednesday, March 16, 2022

बासन्ती बयार बहे जब

 होली का उत्सव मनों में कितनी उमंग जगाता है, सारा वातावरण जैसे मस्ती के आलम में डूब जाता है. प्रकृति भी अपना सारा वैभव लुटाने को तैयार रहती है. बसंत और फागुन की मदमस्त बयार बहती है और जैसे सभी मनों को एक सूत्र में बांध देती है. उल्लास और उत्साह के इस पर्व पर कृष्ण और राधा की होली का स्मरण हो आना कितना स्वाभाविक है. कान्हा के प्रेम के रंग में एक बार जो भी रंग जाता है वह कभी भी उससे उबर नहीं पाता. प्रीत का रंग ही ऐसा गाढ़ा रंग है जो हर भक्त को सदा के लिए सराबोर कर देता है. मन के भीतर से सारी अशुभ कामनाओं को जब होली की अग्नि में जलाकर साधक खाली हो जाता है अर्थात उसका मन शुद्ध वस्त्र पहन लेता  है तो परम  उस पर अपने अनुराग का रंग बरसा देता है. अंतर में आह्लाद रूपी प्रहलाद का जन्म होता है, विकार रूपी होलिका भस्म हो जाती है और चारों ओर सुख बरसने लगता है. होली का यह अनोखा उत्सव भारत के मंगलमय गौरवशाली अतीत का अद्भुत भेंट है.

Monday, March 18, 2019

बासंती बहे बयार जब



फागुन माह के आगमन के साथ ही ह्रदयों में इन्द्रधनुष बनने-संवरने लगते हैं, और पूर्णिमा आते-आते दिलों में उमंग बढ़ जाती है. इस बासंती रुत में प्रकृति अपने पूरे श्रृंगार के साथ खिल जाती है. पलाश, कंचन, सेमल और अशोक के वृक्ष कुसुमों का परिधान पहन लेते हैं. नींबू और आम के वृक्ष जैसे साल भर से संग्रहित हुआ अपना सुरभि स्रोत उड़ाने को व्याकुल हैं. हवा में एक मदमस्त कर देने वाली सुगंध अनायास ही समाई रहती है. बगिया रंग-बिरंगे फूलों से सजी है, सभी मानो एक-दूसरे से होड़ ले रहे हैं. खेतों में गेहूँ और सरसों झूमती-इठलाती नजर आती हैं. फागुनी हवा चलती है तो लोकमन भी संकोच की बेड़ियाँ तोड़कर ढोल-मंजीरे व झांझ की ताल पर थिरकने को आतुर हो उठता है. कण-कण से वसंत राग सहज ही फूटने लगता है. ऐसे में होलिकादहन के उत्सव में जो हृदय के सारे वैर और द्वेष भाव को जला देता है, उसके अंतर में ही आह्लाद सुरक्षित रहता है. उसी आह्लाद को उल्लास पूर्ण वातावरण में एक-दूसरे के साथ बांटने का नाम होली है.

Friday, March 2, 2018

होली आई रे कन्हाई


३ मार्च २०१८ 
होली का उत्सव यानि प्रेम का उत्सव, होली रंगों में भीग कर सबके साथ एक हो जाने का उत्सव है, छोटे-बड़े का भेद भुलाकर समानता का अनुभव करने का उत्सव है. हर पुरानी कड़वाहट को मिटाकर गुझिया की मिठास बांटने का उत्सव है. होली जैसा अनोखा उत्सव और कोई नहीं, जिसमें एक दिन के लिए मन अतीव उल्लास से भर जाता है. जान-पहचान हो या न हो सभी को रंग लगाने का अपने आनंद में शामिल करने का जिसमें सहज ही प्रयास होता है. मन विशाल हो जाता है, किन्तु इसे भी कुछ लोग अहंकार के कारण चूक जाते हैं. हमारे आपसी मतभेद और टकराहटें जब समष्टि के इतने बड़े आयोजन को देखकर भी दूर नहीं होते तब उनके मिटने का और कोई उपाय नजर नहीं आता.

Saturday, March 11, 2017

रंग चढ़े न दूजा कोई

१२ मार्च २०१७ 
होली का उत्सव मनों में कितनी उमंग जगाता है, सारा वातावरण जैसे मस्ती के आलम में डूब जाता है. प्रकृति भी अपना सारा वैभव लुटाने को तैयार रहती है. बसंत और फागुन की मदमस्त बयार बहती है और जैसे सभी मनों को एक सूत्र में बांध देती है. उल्लास और उत्साह के इस पर्व पर कृष्ण और राधा की होली का स्मरण हो आना कितना स्वाभाविक है. कान्हा के प्रेम के रंग में एक बार जो भी रंग जाता है वह कभी भी उससे उबर नहीं पाता. प्रीत का रंग ही ऐसा गाढ़ा रंग है जो हर भक्त को सदा के लिए सराबोर कर देता है. मन के भीतर से सारी अशुभ कामनाओं को जब होली की अग्नि में जलाकर साधक खाली हो जाता है अर्थात उसका मन शुद्ध वस्त्र पहन लेता  है तो परम  उस पर अपने अनुराग का रंग बरसा देता है. अंतर में आह्लाद रूपी प्रहलाद का जन्म होता है, विकार रूपी होलिका भस्म हो जाती है और चारों ओर सुख बरसने लगता है. होली का यह अनोखा उत्सव भारत के मंगलमय गौरवशाली अतीत का अद्भुत भेंट है.