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Monday, March 6, 2023

होली के दिन दिल मिल जाते हैं

होली का उत्सव यानि प्रेम का उत्सव !  होली रंगों में भीग कर सबके साथ एक हो जाने का उत्सव है, छोटे-बड़े का भेद भुलाकर समानता का अनुभव करने का उत्सव है. हर पुरानी कड़वाहट को मिटाकर गुझिया की मिठास बांटने का उत्सव है. होली जैसा अनोखा उत्सव और कोई नहीं, जिसमें एक दिन के लिए मन अतीव उल्लास से भर जाता है. जान-पहचान हो या न हो सभी को रंग लगाने का अपने आनंद में शामिल करने का जिसमें सहज ही प्रयास होता है. मन विशाल हो जाता है, किन्तु इसे भी कुछ लोग अहंकार के कारण चूक जाते हैं. हमारे आपसी मतभेद और टकराहटें जब समष्टि के इतने बड़े आयोजन को देखकर भी दूर नहीं होते तब उनके मिटने का और कोई उपाय नजर नहीं आता.

Wednesday, June 21, 2017

योगी बनें उपयोगी बनें

२१ जून २०१७ 
हमारे अस्तित्त्व के कई स्तर हैं, कोई भी व्यक्ति अंतिम स्तर तक भी जा सकता है और केवल पहले पर ही रह कर पूरा जीवन बिता सकता है. देह के स्तर पर अन्य जीवों और मानवों में ज्यादा भेद नहीं है, मन के स्तर पर मानव मनन चिंतन कर सकता है जो अन्य प्राणी नहीं कर सकते. आत्मा के स्तर पर मनुष्य अपने भीतर आनंद और शांति के स्रोत से जुड़ सकता है. उसे पूर्ण स्वाधीनता और प्रसन्नता का अनुभव इसी स्तर पर होता है. योग ही इसका एकमात्र उपाय है. योग का अर्थ है जुड़ना, व्यष्टि का समष्टि से जुड़ना अथवा तो मन का आत्मा से जुड़ना. इसका आरम्भ देह से होता है, फिर श्वास की सहायता से मन की गहराई में जाकर व्यक्ति को जगत के साथ एकत्व का अनुभव होता है. योग को केवल कुछ आसनों तक ही सीमित कर देना ऐसा ही है जैसे शिक्षा का उपयोग मात्र जीविकापार्जन के लिए करना. 

Tuesday, October 30, 2012

मिले समाधि से समाधान


हम सभी एक विशाल समष्टि के अंग हैं, इस नाते सभी एक-दूसरे से बंधे हैं पर हमारी अलग-अलग पहचान है, जब यह पहचान भी नहीं रहती तब मन सारी सीमाओं को तोड़कर असीम में मिल जाता है. हममें से हरेक की चेतना अनंत है पर हम छोटे-छोटे दायरों में बंधे होने के कारण उस विशालता का अनुभव नहीं कर पाते हैं. समाधि की अवस्था में सम्भवतः ऐसा ही अनुभव होता है, सारा का सारा ब्रह्मांड एक तत्व से बना है यह स्पष्ट होता है, फिर कोई भेद नहीं, अद्वैत का अनुभव होने के बाद अंतर में राग-द्वेष नहीं रह सकते.

Friday, July 29, 2011

ईश्वरीय प्रेम


जुलाई २००१ 
ईश्वर को प्रेम करने का अर्थ संसार विरोधी हो जाना नहीं है. जब हमारे जीवन में प्रेम होता है तो वह सबके लिये होता है उसमे सारी समष्टि समा जाती है. ईश्वर, प्रकृति, मानव उससे कुछ भी अछूता नहीं रहता. प्रेम की बाढ़ सब कुछ बहा कर ले जाती है, उसमें गहन ऊर्जा छिपी है, जो आस-पास की हर वस्तु को एक नए दृष्टिकोण से दिखाती है.