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Friday, November 6, 2020

समिधा बने यह जीवन अपना

 

अनंत युगों से सृष्टि का यह यज्ञ अनवरत चल रहा है। समय-समय पर न जाने कितने अवतार, संत, महापुरुष, ऋषि व जन सामान्य ने भी इस यज्ञ में अपनी आहुति प्रदान की है, वर्तमान में भी कर रहे हैं। कोई लेखक जब कष्ट उठाकर भी समाज के उत्थान के लिए साहित्य का सृजन करता है, अथवा कोई संगीतकार या गायक जब घंटों अभ्यास करता है, वे अपनी प्रतिभा की हवि का अर्पण ही कर रहे हैं। जन कल्याण का कोई भी अभियान हो उसमें अनेक जन अपने जीवन को ही समिधा बनाकर अर्पित कर देते हैं। वर्तमान में भी एक यज्ञ चल रहा है, कोरोना से बचाव का, इसके प्रभाव से स्वयं को व अन्यों को भी मुक्त रखने का। हम सभी को सजगता पूर्वक अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखकर इसमें अपनी समिधा डालनी है। सकारात्मक सोच, नियमित योग साधना, ध्यान का अभ्यास, प्रकृति का सम्मान तथा सात्विक आहार के द्वारा हम सहज ही अपने स्वास्थ्य की रक्षा कर सकते हैं। ये सभी उपाय हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ा देते हैं।   

Sunday, February 9, 2020

ज्ञान का दीपक सदा जल रहा



उत्तर में हिमालय से दक्षिणी तट के अंतिम छोर तक भारत बसता है, प्रान्त-प्रान्त में अपनी अनोखी संस्कृति के साथ भारत हँसता है. वाकई सारी दुनिया में सबसे अनोखा है भारत, जो हजारों वर्षों से अपनी छवि को बरकरार रखे हुए है. इसके पीछे एक ही कारण नजर आता है, यहां की माटी में अध्यात्म रचा-बसा है. वेद मन्त्रों का गायन, यज्ञ, होम, हवन और अंतर को निर्मल करने वाले उपनिषदों का अध्ययन इसे शाश्वतता प्रदान करता है. ऋषि-मुनियों की अंतर्दृष्टि से उपजे सृष्टि के अनोखे रहस्यों को उजागर करते महान ग्रन्थ आज भी यहाँ मौजूद हैं. भले ही आक्रांताओं द्वारा पुस्तकालयों को नष्ट कर दिया गया हो, ज्ञान की वह मशाल जो एक बार किसी ज्ञानी के अंतर में जल जाती है, दुनिया के किसी जल से बुझाई नहीं जा सकती. राम हों या कृष्ण, बुद्ध हों या महावीर, कबीर हों या मीरा, सभी ने भारत भूमि को गौरवान्वित किया है, कर रहे हैं और करते रहेंगे. यहाँ शिव की पूजा शिव होकर की जाती है, भगवान को अपने से दूर नहीं बल्कि स्वयं में ही देखना सिखाया जाता है. मस्ती भरी एक उदासीनता, एक फक्कड़पन यहाँ की जलवायु में घुला-मिला है. भारत के इस गौरव को बनाये रखने और बढ़ाने में हर भारतीय अपना योगदान दे सकता है. पर्यावरण के प्रति सजग होकर, अपने नियत कार्य को भली प्रकार करके, एक नागरिक के कर्त्तव्यों को निभाकर और सबसे आवश्यक आने वाली पीढ़ी को इसके प्राचीन अनमोल साहित्य से परिचित कराकर हम सभी यह कार्य कर सकते हैं.

Tuesday, March 26, 2019

यज्ञ बने यह जीवन अपना


समय की धारा अपनी सहज गति से बहती जाती है. कोई उसके तट पर बैठ कर भी प्यासा रहे तो यह उसकी भूल है. जीवन का हर पल अपने भीतर एक सम्भावना को व्यक्त करने की क्षमता रखता है. कभी हम उस पल को पहचान लेते हैं और स्वयं के भीतर उस तृप्ति को महसूस करते हैं जो मन को अभीप्सित है. अक्सर हम समय को व्यर्थ ही गुजर जाने देते हैं. ऐसा नहीं है कि वह तृप्ति कोई ऐसी वस्तु है जिसे हम सहेज कर रख सकते हैं, पर जो पल हम सजगता के साथ जीते हैं वे भविष्य के लिए एक थाती बनकर हमारे साथ हो लेते हैं. जो समय यूँही चला जाता है वह खुले हुए नल से नाली में बहते पानी की तरह ही बह जाता है, उसका कोई प्राप्य नहीं है. सृष्टि में प्रतिपल कुछ न कुछ घट रहा है, मानव को छोड़कर सभी एक यज्ञ में अपनी आहुतियां डाल रहे हैं. हमें भी अपने हिस्से का योगदान इसमें करना है, यह भाव बना रहे तो प्रकृति उसके लिए साधन जुटा ही देती है.

Tuesday, February 18, 2014

एक वही जानने योग्य

अगस्त २००५ 
परमात्मा एक है, उसको अनेक लोग अनेक भावों से भजते हैं. शास्त्रों में लिखा है, सत्य, यज्ञ, तप और दान ये धर्म के चार स्तम्भ हैं जिनके आश्रय से परम शांति का अनुभव किया जा सकता है. शुद्ध क्रिया ही सत्य का आश्रय लेती है, वही तप स्वरूप है और यज्ञ भी वही है. शुद्ध क्रिया के लिए ज्ञान और शक्ति का साथ होना आवश्यक है. बांटने का अपना महत्व है, ईश्वर  के गुणों को अपनाते हुए जो भी हमारे पास प्रचुर मात्र में है बांटना है. जितना आवश्यक हो उससे अधिक की कामना भी नहीं करनी है, जिस क्षण मन कामना से रहित हुआ, प्रेम उसमें आकर बस जाता है, साधक के हृदय में अहोभाव की स्थिति बनी रहती है. उसके माध्यम से परमात्मा जो कराना चाहे वह सदा तैयार रहता है.