Thursday, September 10, 2020

दुःख से जो भी चाहे मुक्ति

 जीवन से परिचय पाना हो तो नींद से जागना होगा. एक नींद तो वह है जो हम रात्रि में विश्राम के लिए लेते हैं और सुबह जाग जाते हैं, एक और नींद है जो हम अधूरे ज्ञान की चादर ओढ़ कर ले रहे हैं. हमारी छोटी सी बुद्धि इस अनंत सृष्टि के एक कण का राज भी नहीं जानती पर उसे लगता है वह सब कुछ जानती है. एक छोटा सा उपकरण भी हो उसके साथ एक किताब आती है जो उसके बारे में सम्पूर्ण जानकारी देती है, पर अफ़सोस की इस  देह, मन, बुद्धि के साथ कोई पुस्तक नहीं आती. हम जितना ज्ञान किताबों से और बड़ों से, विद्यालय से प्राप्त कर लेते हैं, सोचते हैं उतना इसे चलाने के लिए पर्याप्त है. एक दिन ऐसा आता है जब अपनी ही देह रोगी होकर, मन उदास होकर, बुद्धि भ्रमित होकर हमारे दुःख का कारण बन जाते हैं. इसका अर्थ हुआ कि हमारे ज्ञान में कुछ तो कमी है, ऐसे में किसी सदगुरू का जीवन में पदार्पण अथवा सन्त वाणी का श्रवण ही उस ज्ञान से हमारा परिचय कराता है जो हर दुःख से मुक्त कराके सुख की सौगात देता है. 


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