Wednesday, July 19, 2023
जाने क्या है राज अनोखा
Saturday, July 15, 2023
जब विवेक सधे जीवन में
हमारे जीवन की बागडोर हमने विवेक के हाथों में सौंपी है या मन के, इसकी खबर हमें तब मिलती है, जब जीवन में व्यर्थ के कष्ट आते हैं। दिनचर्या यदि सुव्यवस्थित नहीं रखी, अनुशासन का पालन नहीं किया, स्वाद के वशीभूत होकर अखाद्य पदार्थों का सेवन किया। रात्रि को देर तक जागरण किया। समय को व्यर्थ गँवाया। अपनी वाणी पर नियंत्रण नहीं किया। अपनी ख़ुशी के लिए संसार से उम्मीदें रखीं, जो पूरी नहीं हुईं तो उसका अफ़सोस किया। ये सब बातें विवेक के विपरीत हैं। हम अपने आप को भूले न रहें। देह, मन, बुद्धि आदि की सेवा में ही न लगे रहें, बल्कि ऐसा विवेक जगायें जो आत्मा के सानिध्य में ले जाये। विवेक का अर्थ है यह ज्ञान कि संसार उसी का नाम है जो निरंतर बदल रहा है। जो नित्य-अनित्य, सांत-अनंत में भेद करना सिखाये वही विवेक है।नित्य और अनंत के साथ एकत्व का अनुभव किए बिना कोई मुक्त नहीं हो सकता।
Tuesday, July 11, 2023
सत्यं शिवं सुंदरं
जीवन का हर पक्ष सुंदर हो, साधक को सदा इस बात का बोध रहना चाहिए। सौंदर्य की परख भी प्रेम, शांति तथा आनंद की भाँति मन की गहराई में जाकर मिलती है। शुद्ध चैतन्य को 'सत्यं शिवं सुंदरं' कहा गया है, जिससे जुड़कर साधक को सूक्ष्म व अरूप सौंदर्य की झलक मिलती है। जो अपने भीतर गया है वही प्रकृति के भीतर छिपे उस अनाम सौंदर्य से जुड़ सकता है। वायु का स्पर्श, आकाश की अनंतता, अग्नि की लपटों का आकर्षक रूप, बहाते हुए जल का कलकल नाद, उसमें उठती हुई तरंगें, धरती पर पर्वत, घाटियाँ, जंगल, आदि उसे सौंदर्य की ख़ान के रूप में दिखायी देते हैं। इस असीम सुंदरता को संरक्षित व सुरक्षित रखने की भावना सहज ही भीतर जगती है। उन्हें प्रदूषित करने का विचार भी उसके मन में नहीं आ सकता। यदि नई पीढ़ी को बचपन से ही ध्यान सिखाया जाये तो वे इस गुण को सहज ही अपना लेंगे और अपने आस-पास एक सुंदर वातावरण का निर्माण करेंगे।
Thursday, July 6, 2023
तोरा मन दर्पण कहलाये
मन उसी का नाम है जो सदा डांवाडोल रहता है, तभी मन को पंछी भी कहते हैं हिरन भी और वानर भी..आत्मा रूपी वृक्ष के आश्रय में बैठकर टिकना यदि इसे आ जाये तो इसमें भी स्थिरता आने लगती है, वास्तव में वह स्थिरता होती आत्मा की है प्रतीत होती है मन में, जैसे सारी हलचल होती बाहर की है प्रतीत होती है मन में।मन तो दर्पण ही है जैसा उसके आस-पास होता है झलक जाता है. संगीत की लहरियों में डूबकर यह मस्त हो जाता है और किसी उपन्यास के भावुक दृश्य में भावुक।ऐसे मन का चाहे वह अपना हो या अन्यों का क्या रूठना और क्या मनाना।क्यों न हर सुबह मन को समझते हुए प्रवेश करें ताकि न किसी से मनमुटाव हो और न किसी का मन टूटे. आत्मा रूपी वृक्ष पर कुसुम की तरह खिला रहे सबका मन.
Tuesday, July 4, 2023
मर्म गुरु का जाना जिसने
जब किसी के जीवन में गुरु का पदार्पण होने वाला होता है, उसके पूर्व उसके मन में ईश्वर के प्रति प्रेम जागृत होता है। वह ईश्वर से प्रार्थना करता है कि उसे कोई पथ प्रदर्शक भेज दे। वह मार्ग ढूँढ रहा होता है पर उसे मार्ग दर्शक नहीं मिलता। तब अस्तित्त्व या परमेश्वर ही गुरु को भेजते हैं। गुरु, आत्मा और ईश्वर एक ही हैं। जब पुकार आत्मा की गहराई से उठती है, अंतर्यामी परमात्मा उसे सुन लेता है और उससे एक हुए गुरु तक वह पहुँच जाती है। दिल की गहराई से की गई कोई प्रार्थना व्यर्थ नहीं जाती, वह अवश्य फलीभूत होती है। हमारी प्यास यदि सच्ची है तो जल वहीं छलक जाता है।जीवन में जैसे उजाला हो जाता है, गुरु का अर्थ ही है जो अंधकार को दूर करे और प्रकाश फैलाए। कोई एक सदगुरु करोड़ों लोगों के जीवन में ज्ञान का प्रकाश फैला सकते हैं । वह आत्मा की गहराई में वैसे ही जुड़े हैं जैसे परमात्मा सर्वव्याप्त है। वह भी अंतर्यामी हैं, उनके मन व बुद्धि गंगाजल की तरह पवित्र और कैलास स्थित मानसरोवर के हंस के समान नीर-क्षीर विवेकी हैं। वह शुद्धता की कसौटी पर सच्चे मोती की तरह हैं, वह निसंग, निर्द्वंद, निरंजन हैं। वह निरन्तर समाधि का अनुभव करते हैं। वह उस तत्व से जुड़े हैं जो अविनाशी, अजर, अमर है, वह उस ज्ञान की पराकाष्ठा हैं जो हृदय को आनंद व प्रेम से भर देता है।
Sunday, July 2, 2023
गुरु ज्ञान जीवन में आये
Thursday, June 29, 2023
जीवन में जब आये योग
शास्त्रों के अनुसार हमार शरीर एक रथ है अथवा तो एक वाहन है। आत्मा इसमें यात्री है, बुद्धि सारथि अथवा वाहन चालक है। मन लगाम या स्टीयरिंग है। इंद्रियाँ घोड़े अथवा पहिये हैं। सामान्य तौर पर यात्री को जहां जाना है वह सारथी से कहता है और अपने गंतव्य पर पहुँच जाता है। किंतु इस आत्मा रूपी सवार को अपना ही बोध नहीं है, इसलिए उसे कहाँ जाना है इसका बोध कैसे रहेगा।चालक का भी लगाम पर नियंत्रण नहीं है, घोड़े भी मनमानी करते हैं। कोई उत्तर जाना चाहता है, जहां से सुंदर ध्वनियाँ आ रही हैं, कोई दक्षिण, जहां से सुंदर गंध आ रही है। इंद्रियाँ ऐसे ही मन को भटकाती हैं, बुद्धि मन के पीछे लगी है। आत्मा कहीं भी पहुँच नहीं पाती, हिचकोले खाती, उन्हीं दायरों में घूमती रहती है। कभी दुर्घटना हो जाती है तो वह चौंक कर जागती है, वाहन को दुरस्त कराती है, योग का जीवन में प्रवेश होता है। सारथि को लगाम पकड़ना सिखाना ही मन का नियंत्रण करना है। सारथि रूपी बुद्धि का ज्ञान से योग होता है तो जीवन की गाड़ी सही मार्ग पर चलने लगती है। मार्ग में सुंदर प्रदेशों के दर्शन करते हुए वह अन्यों का भी सहयोग करती है। जीवन का एक नया अध्याय आरंभ होता है।