Wednesday, April 22, 2020

पृथ्वी दिवस मनाएं हम


आज पृथ्वी दिवस है, अर्थात पृथ्वी के प्रति सम्मान दिखाने का दिवस ! पृथ्वी जो हमारी माँ है, जिसने हमें जीवन दिया है, जो हमारा पोषण करती है, जो हमें सुख देती है. इस अनंत ब्रह्मांड में जहाँ जीवन को खिलने का अवसर मिलता है, उस धरती का हम कितना ही गुणगान करें, कम है. वह पृथ्वी आज घायल है, अपशिष्ट पदार्थों का एक बड़ा भंडार उस पर बोझ बन गया है, वह हर कूड़े को खाद बना देती है पर उसे समय तो मिले. मानव कचरे का ढेर दिन-रात बढ़ाता ही जा रहा है, जल में रसायनों और प्लास्टिक डालता ही जा रहा है. मानव जब अपनी करनी से बाज नहीं आ रहा था तब शायद प्रकृति ने ही कोरोना के रूप में एक विपदा भेजी है. आज जब हम घरों में बैठे हैं, पृथ्वी अपने को स्वच्छ कर रही है अर्थात पृथ्वी अपना दिवस स्वयं ही मना रही है. वेदों में पर्यावरण की सुरक्षा के लिए कितने ही मन्त्र गाये गए हैं. आज आवश्यकता है उन्हें फिर से दोहराने की, जिससे हमारा यह सुंदर ग्रह फिर से अपनी खोयी हुई शांति और सुंदरता को प्राप्त कर सके. हरे-भरे जंगल, उनमें विचरते हुए निःशंक प्राणी और प्रकृति का संरक्षण करता हुआ मानव समाज फिर से अस्तित्त्व में आ सके. 

Sunday, April 19, 2020

हीरा जनम अमोल था


सन्त और शास्त्र कहते हैं मानव जन्म दुर्लभ है. मानव यदि इस बात पर यकीन करता तो अपने जीवन से खिलवाड़ न करता. आज के हालात में देखा जाये तो जो लोग अनुशासन का पालन नहीं कर रहे हैं, अपने जीवन से खिलवाड़ ही कर रहे हैं. आज काल अपना मुख खोले जीवन को ग्रसने के लिए तैयार खड़ा है, जरा सी असावधानी से कोई स्वयं को एक ऐसे रोग से ग्रस्त कर सकता है जिसका कोई इलाज अभी तक ईजाद नहीं हुआ है. यहाँ मेरा तात्पर्य मात्र कोरोना से भी नहीं है, एक और रोग है जिससे मानव ग्रसित है, यह रोग है प्रमाद, जिसका कोई इलाज डॉक्टरों के पास नहीं है, इसका इलाज तो हमें स्वयं ही करना है. प्रमाद का सबसे बड़ा प्रमाण है कि हमें अपने जीवन का मोल नहीं पता, क्या होता यदि हम मानव देह में न होकर किसी अन्य योनि में जन्मते, अथवा तो अभी तक लाखों आत्माओं की तरह देह पाने के लिए प्रतीक्षारत ही रहे होते. मानव देह पाकर इसका मोल समझने का अर्थ है कि हम स्वयं के वास्तविक स्वरूप से परिचित होने की तरफ सजग हों, किसी अन्य योनि में यह सम्भव ही नहीं है. वशिष्ठ मुनि से इसी का ज्ञान पाकर राम, राम हो पाते हैं, अष्टावक्र से ज्ञान पाकर जनक विदेह बनते हैं.  

Saturday, April 18, 2020

भारत पर जो नाज करेगा


हम भारत के लोग हमारे संविधान में यह पंक्ति सबसे पहले लिखी गयी है, और यही है भारत की असीम शक्ति का स्रोत ! मुझे इस बात का अनुभव् कई बार हुआ है और आज  मैं आपके साथ अपना यह अनुभव साझा कर रही हूँ. मेरा जन्मस्थान उत्तरप्रदेश में है, जीवन के आरंभिक पचीस वर्ष वहाँ के भिन्न शहरों में बीते। सरकारी नौकरी के कारण पिताजी किसी भी स्थान पर तीन या चार वर्ष से अधिक नहीं रहते थे. हर बार नए शहर में, नये घर में जाने पर हमें अपने आस-पास एक ही जैसे लोग मिले. हर जगह राम और कृष्ण की कहानियाँ कहने-सुनने वाले लोग, आपस में मिलकर होली, दीवाली आदि त्योहार मनाने वाले लोग. विवाह के बाद वर्षों असम में रहना हुआ, जहाँ पूरे भारत से आये भिन्न भाषा-भाषी लोगों से मिलने का सौभाग्य मिला. उड़िया, बंगाली, तमिल, तेलगु, कन्नड़, पंजाबी, सिख, नागा, मिजो गढ़वाली सभी प्रदेशों के लोग वहाँ एक साथ रहते हैं. सभी को आपस में जुड़ने के लिए कोई विशेष प्रयत्न नहीं करना पड़ता. सबको जोड़ती है भारत की प्राचीन गौरवशाली संस्कृति ! भारत को एक सूत्र में बाँधा है यहां की नदियों के प्रति आस्था ने, पर्वतों पर बने देव स्थानों ने और परब्रह्म के प्रति अटूट श्रद्धा ने ! हर भारतीय सहज ही श्रद्धावान  है, उसके जीवन में व्रत का स्थान है  तभी वह अनुशासन का पालन कर सकता है. हम केवल भौतिक अस्तित्त्व को ही नहीं देखते उसके परे जो दैविक और आध्यात्मिक है उसे भी साथ लेकर चलते हैं. आपकी तरह मुझे भी भारत पर गर्व है और गर्व है हजारों वर्षों से चली आ रही इसकी अक्षुण्ण सांस्कृतिक धारा पर. आइये हम भारत के लोग मिलकर देश के इस आपद काल में अपना-अपना कर्त्तव्य निभाएं. घर में रहें और स्वस्थ रहें. 

Friday, April 17, 2020

अंतरशक्ति जगायेगा जो


शक्ति का संधान किये बिना राम भी रावण का संहार नहीं कर सके थे. आज कोरोना रूपी रावण का संहार करना है इसके लिए भी सभी देशवासियों को अपने भीतर शक्ति का संधान करना है. सबसे पहले इस लंबी लड़ाई को लड़ने के लिए मन में अनवरत उत्साह बनाए रखना जरूरी है. वैज्ञानिक और स्वास्थ्य कर्मी दिन-रात एक करके इसका निदान खोज रहे हैं, आज नहीं कल इसका वैक्सीन बन ही जायेगा. इस भरोसे को बनाये रखने के लिए सकारात्मक सोच जरूरी है, जो आती है शक्ति की साधना से. हर दिन कुछ न कुछ नया रचना या करना है, चाहे छोटे से छोटा कृत्य ही क्यों न हो. उदारता से भी शक्ति बढ़ती है और मन की गहराई में प्रेम और करुणा की जो भावना सुप्त है उसे जगाने से भी. कृतज्ञतापूर्वक अपने जीवन में मिले साधनों में से कुछ को औरों के लिए त्यागने से भी. विश्व, देश और समाज में आज जो स्थिति है उसको स्वीकार करके ही उसके पार जाने का मार्ग मिल सकता है. 

Thursday, April 16, 2020

ज्ञान का जो सम्मान करे मन


जहाँ ज्ञान का तिरस्कार होता है वहाँ सजगता खो जाती है. वास्तव में बेहोश होकर ही हम अज्ञानी हो सकते हैं. हम जानते हैं कि हमारे लिए क्या अच्छा है, पर चुनते वही हैं जो हमें पसंद है, यह जानते हुए भी कि यह हमारे के लिए सही नहीं है. सन्त कहते हैं यदि हम प्रेय मार्ग को चुनेंगे तो दुःख से बचना असम्भव है, श्रेय मार्ग को चुनेंगे तो जीवन में दुःख का कोई स्थान ही नहीं रहेगा. इसका अर्थ यह नहीं है कि जीवन में कोई दुखद परिस्थिति नहीं आएगी, बल्कि हम हर स्थिति में समता में रहना सीख जायेंगे. प्रेय मार्ग हमें कमजोर बनाता है, हम केवल सुख के अभिलाषी बन जाते हैं. जरा सा दुःख हमें अपने केंद्र से विचलित कर देता है. श्रेय मार्ग का चयन हमें भीतर से दृढ़ता प्रदान करता है. इसके लिए पहला कदम है, राग-द्वेष से मुक्त होना, हम यदि जीवन को जिस रूप में वह मिलता है स्वीकार करना चुनते हैं तो एक स्थिरता भीतर प्रकट होती है.यह स्थिरता हमें सही-गलत में भेद करना सिखाती है और सही का चुनाव करने का बल देती है. श्रेय मार्ग का चयन तब सहज हो जाता है. 

Tuesday, April 14, 2020

आशावादी मन जो होगा


उन्नीस दिनों में लिए सरकार ने लॉक डाउन की अवधि को बढ़ा दिया है. यह अभूतपूर्व काल है, पिछले सौ वर्षों के इतिहास में मानव इतनी भीषण महामारी से पहली बार जूझ रहा है. कोई इसे संकट काल  कहेगा और अवसाद से घिर जायेगा, कोई इसे अनुशासन पर्व कहेगा और जीवन को उन्नत बनाएगा. समय की कमी का बहाना  करके जो कार्य हम वर्षों तक टालते रहे हैं उनके आरंभ के लिए यह सुवर्ण काल है. गहन चिंतन, मनन और श्रवण के लिए एक साधक को जितना एकांत और समय चाहिए उसका प्रबन्ध प्रकृति ने इस प्रकोप के बहाने कर दिया है. कुदरत भी इस समय स्वयं को सेहतमंद कर रही है, तो हमारा भी कर्त्तव्य बनता है कि इस समय को सुंदर बनाएं. हमारा वर्तमान अतीत के कर्मों का फल है और भविष्य आज के कृत्यों का फल होगा. यदि आज मन में निराशा, हताशा या अस्वीकार की भावना प्रमुख रही तो कल भी इससे भिन्न परिणाम लेकर नहीं आएगा. जीवन तो सबको एक जैसा ही मिलता है उसे देखने वाली दृष्टि भिन्न -भिन्न होती है. आशावादी दृष्टिकोण से देखें तो हर घटना के पीछे छिपे बोध पर हमारी नजर जाएगी. घटना बाहर रहेगी और वह बोध हमें उसके असर से अछूता ही छोड़ देगा. 

Monday, April 13, 2020

तन-मन दोनों स्वस्थ रहें जब


अब जबकि यह तय हो ही चूका है कि ताला बंदी की अवधि बढ़ायी जाएगी तो हमें भी भविष्य के लिए तैयार हो जाना चाहिए. अपने समय का सदुपयोग उसमें सबसे पहली प्राथमिकता है. घर में जो भी सामान समाप्त हो रहा हो उसकी सूची बनाकर अगले एक महीने के लिए एक साथ लेकर रख लेना भी ठीक रहेगा. सुबह उठकर नियमित योग-साधना और घर में थोड़ा सा भ्रमण भी अति आवश्यक है. पूजा के समय रामायण, भगवद गीता या किसी अन्य धर्म ग्रन्थ अथवा  किसी सन्त की वाणी का एक पृष्ठ पढ़ने की आदत भी दिन भर मन को सजग और प्रफ्फुलित बनाये रखने के लिए अच्छी है. भोजन बनाते समय यह ध्यान रखना है कि सुपाच्य हो यानि ज्यादा भारी न हो, व ताजा हो. गर्मी का मौसम है इसलिए भुने जीरे के साथ रोज मठ्ठे का सेवन लाभदायक है. कोई न कोई पुस्तक पढ़ना या पढ़कर बच्चों को सुनाना, बोर्ड गेम खेलना और हास्य कार्टून या फिल्म देखना भी इस कठिन समय में मन को खुश रखने में सहायक है. कोरोना से बचकर रहने के लिए घर में रहना ही जब एकमात्र उपाय है तो क्यों न हम अपने घर में ही वह सब आयोजन कर लें जिसके लिए बाहर जाते हैं. सबसे पहले तो घर के सारे पर्दे धो डालें, कुशन कवर, चादरें सब अच्छी वाली बिछाएँ, जैसे मेहमानों के आने पर बिछाते हैं. हॉल के एक कोने में स्कूल, एक में लाइब्रेरी, एक में थियेटर बना लें. किचन को ही आलीशान रेस्ट्रां और छत, आंगन या बरामदे को ही बगीचा. संभाल कर रखी हुई अच्छी क्राकरी और बर्तन भी निकालें, हर दिन नए तरीके से भोजन परोसें. अब अगले कुछ हफ्तों या कौन जाने महीनों तक हमारा घर ही हमारा संसार रहने वाला है, सो आइये इस घर को इस तरह सजाएं और सँवारे कि बाहर जाने का मन ही न करे.